#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

तुमसे रिश्ता कोई गहरा है

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मेरे दिल की हर बात समझती हो

मेरे खयालात समझती हो

 

तुमसे रिश्ता कोई गहरा है

तभी मेरे जज्बात समझती हो

 

रहूं खामोश तो मायूस तुम भी तो

तुम मेरे हालात समझती हो

 

आती नहीं नींद करवट बदलता हूँ

कैसे कटती मेरी रात समझती हो

 

आँखों में समाई है तस्वीर तुम्हारी

मिलना बिछड़ना मुलाकात समझती हो

 

भीगी भीगी सी मेरी आँखें

पता है तुम ये बरसात समझती हो

 

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

भटेरा चौकी बालाघाट

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