#Kavita by KIshor Chhipeshwar Sagar

गुजरा जमाना नहीं है…..

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अब तो तुम्हारी चाहत दिल से

मिटाना नहीं है

तमाम उम्र तुम्हे भुलाना नहीं है

दर्द मिल जाये हमको भला

पर तुमको कभी तड़पाना नहीं है

दामन में सदा रहे खुशियां तुम्हारे

तुमको कभी सताना नहीं है

दर्द सीने में छुपाकर मुस्कुरा लेंगे

दस्ताने गम तुमको सुनाना नहीं है

मिलकर तुमसे गुजारा करते थे वक्त

अफ़सोस कि वो गुजरा जमाना नहीं है

किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट(म.प्र.)

9584317447

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