#Kavita By Kishor Chhipeshwar Sagar

बातें अब आर या पार की हो
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बातें अब आर या पार की हो
गोला बारूद तलवार की हो

मसले हल नही होते शांति से
बातें पाकिस्तानी हार की हो

डट जाएंगे मैदान ए जंग में
बातें गोलियों की बौछार की हो

मिट्टी में मिला देंगे गद्दारों को
बातें अब ललकार की हो

रखने होंगे सिंहो से हौसले
बातें सब अब हुंकार की हो

घुटने टेकेगा वो दुश्मन भी
बातें कुछ ऐसी लाचार की हो

तोड़ो फोड़ो छलनी कर दो
बातें सब अब वार की हो

-किशोर छिपेश्वर”सागर”
बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

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