#Kavita by Kishr Chhipeshwar Sagar

ध्वज लहरायेंगे
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जश्न आजादी का मनाएंगे
वन्दे मातरम मिलकर गाएंगे

गली चौबारों पे हम नाचे
चलो मिलकर धूम मचाएंगे

भारत माँ को नमन कर लो
रोशनी से अपना घर सजायेंगे

जाति धर्म का भेद नहीं कोई
दिल से दिल हम मिलाएंगे

न द्वेष कोई भी हो बढ़े भाईचारा
मिलकर रहे हम और क्रांति लाएंगे

यही है शाने हिंदुस्तान तिरंगा हमारा
चलो मिलकर ध्वज लहरायेंगे

-किशोर छिपेश्वर”सागर”
बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

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