#Kavita by Krishan Kumar Saini

मनहरण घनाक्षरी~बेटी

 

{अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएँ!}

 

आंगन चहकता है, जिसकी हंसी से अाज,

बेटी है प्रकाश पुंज, बात यह मानिए।।

 

हर क्षेत्र आज बेटी,इतिहास रच रही,

बेटी न बेटे से कम, तात यह मानिए।।

 

बेटी से चले ये सृष्टि, नव सभ्यता प्रविष्टि,

बेटी न पराया धन, मात यह मानिए।।

 

बेटों और बेटियों में, अंतर करो न राज,

बेटी ही मिटाए जात-पात यह मानिये।।

 

कृष्ण कुमार सैनी”राज दौसा,राजस्थान मोबाइल~97855~23855

 

 

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