#Kavita by Krishan Kumar Saini

मुक्त कविता~मेहनत

 

हाँ ! मैं खाता हूं

मेहनत की कमाई।

मैं डरता नहीं हूं

मेहनत करने से।

लक्ष्य को पाने के लिए

मुझे दिन-रात करनी पड़ती

है  कड़ी मेहनत।

कितनी बाधाएं भीआती है

लक्ष्य तक पहुंचने में

हिम्मत और मेहनत से

सब आसान हो जाता है

और मिल जाती है मंजिल।

 

मन को शांति मिलती है

मेहनत करने से।

मेहनत की कमाई

बहुत सुकून देती है।

मेहनत का रसीला फल

मीठा होता है,

मेहनत करने वाला

अपनी मंजिल पाता है।

मुझे विश्वास है

मेरी मेहनत भी

एक दिन रंग लाएगी।

मेरी मंजिल मेरे कदमों में

चलकर आएगी !

चलकर आएगी।।

जन्म लेता है विश्वास

मिल जाती है मंजिल

और मीठा फल

मुझे याद आती है

कहानी एक राजा के दरबार की

जहां फकीर ने

राजा की रोटी से खून

और किसान की रोटी से

दूध निचोडा था

कोई निचोड ले मेरी भी रोटी

मै खाता हूं मेहनत की रोटी।

ऐसे ही होती है

मेहनत की कमाई……!!!!

 

कृष्ण कुमार सैनी”राज दौसा,राजस्थान मोबाइल~97855~23855

 

 

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