#Kavita by Krishan Kumar Saini

सबसे प्यारी होती है आंखों की नींद…..

जब टूटने लगते है स्वप्न आंखों के,तब उड़ने लगती हैं आंखों की नींद…।

 

 

किसी के साथ घटती है घटना।

टूटता है ख्वाबों में बसा सपना।।

तब उड़ती है आंखों की नींद,

जब रूठता है कोई अपना।।

 

मंजिल बनाने में वक्त लगता है।

पंछी भी तिनका-तिनका बुनता है।।

और तब उड़ती हैं आंखों की नींद,

जब टूटते हुए सपनों से डरता है।।

 

 

पाई-पाई जोड़-जोड़ कर लाख कमाई दौलत।

मान कमाया,शान कमाई और कमाई शोहरत।।

तब उड़ती हैं आंखों की नींद,

जब यम के दर पर नहीं मिलती मोहलत।।

 

 

अच्छे-अच्छे ख्वाब देखते रहते हैं।

एक दूजे को यूं ही कोसते रहते हैं।।

तब उड़ती हैं आंखों की नींद,

जब बेटे ईमान बेचने लगते हैं।।

 

 

तब उड़ती है है नींद रातों की,

दिन की

और

जिंदगी की…..।।

 

कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज” दौसा,राजस्थान

मो.97855-23855

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