#Kavita by Krishan Kumar Saini

भजन-कहां हो कन्हैया,कहां हो कन्हैया?

 

 

स्थाई-गायों को चराता है

प्यारा तु गवैया,

 

मारता भी तु है और

तू ही बचैया॥

 

……कहाँ हो कन्हैया ?

 

1.घर परिवार लाखों

तुमने बसाए,

 

उजड़े हुओ के गुल

तुमने खिलाए।

 

तुम ही मेरी नैया के

बन गए खिवैया॥

 

………कहां हो कन्हैया?

 

 

2.पापियों को मार के

हमको है तारा,

 

हम है तुम्हारे और

तू है हमारा।

 

मीठी-मीठी,प्यारी-प्यारी

बंशी के बजैया॥

.

……कहां हो कन्हैया ?

 

 

3.ढूँढ रहा हूँ तुम्हें

जग के अंधेरे में,

 

फँस गया मैं भी प्रभु

दुनिया के घेरे में।

 

“कृष्णा” पुकारे तुझे

माखन लुटैया॥

 

…….कहां हो कन्हैया?

……कहां हो कन्हैया?

कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज”, दौसा,राजस्थान मोबाइल97855~23855

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