#Kavita by Krishan Kumar Saini

मुक्त कविता-आँसू

आती है याद प्रिय की जब,

आंखों से बहते हैं झर झर आंसू…।

पलकें भीग जाती हैं अपनों की याद में,

रातें कट जाती है सपनों की याद में॥

 

 

जन्म से मृत्यु तक आंसू आते रहते हैं….

पैदा होने पर बच्चा रोता है

फिर बचपन में जिद पर…,

जवानी में भागदौड़ से परेशान

और नौकरी के लिए रोता है..।

वयस्क होने पर कंधों पर

घर की जिम्मेदारी आती है

तो होता है परेशान…..

फिर बहते हैं झर झर आँसू…..॥

 

 

जीवन में कोई दु:ख या

दुविधा आती है तो रोता है……

और फिर झर झर बहते हैं आंसू..।

 

 

जब कोई अपना हमें अकेला

छोड़ कर यहां से चला जाता है

तो उसके वियोग में बहते हैं झर झर आंसू……॥

 

कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज”,दौसा,राजस्थान मोबाइल97855~23855

 

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