#Kavita by Krishna Sharma Maharaj

आपने अपना नामो-निशां छोड़ा होता

तो मेरे खत का लिफाफा नहीं कोरा होता

ये हकीकत है कि आप सा कोई ना मिला

आप मिलती तो मैं खुद से ना जुदा होता

मुझे पता है मेरे रूह में बस आप ही हैं

काश! आपके रूह में मेरा भी पता होता

बह रही है जमीं पे चांदनी की नदी

तैरते साये का कोई तो किनारा होता ।

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