#Kavita by Kshitij Bawane

 

°मन्नतें काम नहीं आएंगी.

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मन्नतें काम नहीं आएंगी

ना दुआओं का कुछ असर दिखेगा

अगर तबीयत से कोशिश नहीं होगी

हर ख्वाब अधूरा रह जायेगा!

 

रुक जाने से बात नहीं बनेगी

ना थक जाने से कोई फायदा होगा

अगर लहरों से डर जाएगी कश्ती

तो कभी किनारा नसीब नहीं होगा!

 

ख़ुदा का रहम नज़र नहीं होगा

ना हाथ की लकीरें करम करेंगी

अगर जुनून ज़रा भी कम रह जायेगा

मंजिलें बस ख्वाब ही रह जाएंगी!

 

अखबारों में नाम नहीं होगा

ना जीत का कोई जश्न मनाया जायेगा

अगर नज़र लक्ष्य पर नहीं जमेगी

तो बाज़ी कोई और ही मार ले जायेगा!   क्षितिज बावने

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