#Kavita by Kshitij Bawane

°°°नई सुबह°°°

कल फिर से एक नई सुबह होगी,

भले आसमाँ अभी तारों के बिन है|

आज की काली रात के उस पार,

एक उम्मीदों भरा सुनहरा दिन है!

 

अगली सुबह को हम फिर निकलेंगे,

उतरेंगे और लड़ेंगे मैदान-ए-जंग में|

ऐसी बिसात बिछाएंगे रणवीरों की,

कि रंग देंगे सारा जहाँ अपने रंग में!

 

यह वक्त काटना मुश्किल है तो क्या,

यही तो कुछ क्षण हैं हमारी परिक्षा के|

अस्त सूर्य का कल फिर से उदय होगा,

फिर छँट जाएंगे ये बादल निराशा के!

 

निगलके इस रात को आयेगी नई सुबह,

जो स्थापित करेगी खुद को आसमान में|

फिर रगों में संचरित हुई एक नई ऊर्जा,

निश्चित करेगी विजय जंग के मैदान में!

©क्षितिज बावने

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