#Kavita by Kumari Smriti

मेरी कलम से,

जज्बातों की अर्थी पर
सो जाते हैं कुछ लोग,
सीने पर जख्म हज़ारों लेकर
खो जाते हैं कुछ लोग।
ऐ जिंदगी तेरा एतवार क्या?
औरों की तरह
सभी चले जायेंगे
खामोश
इस जहाँ से
जैसे
सागर के तूफानों में
खो जाती है
एक लहर।।
लेकर कितने एहसास
कितने जख्म
कितनी तड़प
कितनी मायूसियों
के तरंग
रंगहीन
बेजान।
बस जो कालजयी
कहलाते है,
वो कभी हार नहीं मानते,
और न कभी विचलित
होते हैं,
अपने पथ से,
हर हाल में
दिल का नन्हा सा
दीया जलाकर
दिखा जाते हैं,
जिंदगी के संघर्ष का रास्ता,
यही था अटल का अटल से
खूबसूरत वादा और
यही था दुनिया से अटल का वास्ता।

One thought on “#Kavita by Kumari Smriti

  • August 17, 2018 at 8:53 pm
    Permalink

    सुंदर अभिव्यक्ति।

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