#Kavita by Kumar Sonal

दिल

 

आवारा मैं, बेचारा दिल, मंझधार, मैं किनारा दिल,

नशा मुझपे, बंजारा दिल,

है तो किस्मत का मारा दिल,

 

खण्डित हसरतों का पिटारा दिल,

है तो ग़म का फव्वारा दिल,

 

न जाने फिर भी सबको क्यूँ, लगे इतना है प्यारा दिल ?

हमारा दिल, तुम्हारा दिल,

 

कभी सूरज सा है तपता, कभी कोमल-सितारा दिल,

दुनिया के रश्मों-रीत से, है अक्सर ही हारा दिल,

 

तोहमत है अच्छी नहीं, ये करे इशारा दिल,

यही सोच छिपता-फिरता हूँ कहीं, ले जाये न कोई दुबारा दिल,

 

आवारा और बेचारा दिल,

हमारा दिल, तुम्हारा दिल,

Kumar Sonal

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