#Kavita by Kumar Vijay Rahi

ना कृष्णा और ना ही नंद होंगें।

वफा पर जोर के पाबंद होंगे।

वो आंखें कत्ल अब कैसे करेगी,

सुना है…. कत्लखाने बंद होंगे।

चरागों पे हवा की ना चले गर,

बताओ..किस तरह वो मंद होंगें।

वो हमसे युद्ध लडते ही ना लेकिन,

उन्हें मालूम था…जयचन्द होंगें।

मिले जब ‘बुद्ध’ से कोई गुरू तो,

ये’ बच्चे आप ही ‘आनन्द’ होंगें।

तुम्हारा हुस्न तुमको ही मुबारक,

वो होगें…,जो जरुरतमंद होंगें।

पता शिद्दत का ‘राही’ तब चलेगा,

किसी के इश्क में जब छन्द होंगें।

कुमारविजयराही

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