#Kavita by Kumari Archana

“शहादत”

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शहीद हो गई किसी माँ की गोदी,

दुश्मनों  से लङते लङते सीमा पर,

जिस लाल  को नौ महीन कोख में पाला था,

आज उसी लाल को  खून से सना तरंगे में लिपटा देख,

माँ की आसुँअन धारा ना रूकती,

कभी माँ के आचंल में छुप जाया करता,

दुसरोंके साथ शैतानीयाँ करके,

आज वही आंचल ना बचा सका दुश्मनों से,

गर्व से माथा कर सम्मान पा रही,

पर दर माँ का सीना फट रहा,

जैसे धरती माँ का फटता,

आपने लालों को दु:ख में देखकर,

आज उसकी सहादत पर एक माँ फिर शपथ ले रही,

भेजूँगी अपने लाल को देश की सेवा करने के लिए..

कु.अर्चना

 

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