#Kavita by Kuwar Govind Charan

ऐसा एक नेता चाहिए*****
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१.
आज उठे जगत मे,हिन्दुस्तानी चिराग जले।
मुरझाए सुमनो  का  फिर  से  बाग  खिले।

हर युवा के कण-२मे यौवन का जोश खिले।
घिसी-पिट्टी जिन्दगी से आजादी की महक मिले।

घर घर आलोकित हो, तम को दूर भगाए।
इन विरानो मे फिर से जो इंसानियत जगाए।।

लाल किले का सच्चा लाल बने जो गौरवशाली।
ऐसा एक नेता चाहिए ,आज हमे प्रतिभाशाली।।
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२.
चीन की चापलूसी और पाकिस्तान का पाप मिटाकर।
अमेरिका का अक्कड़ और शत्रुता का दाग मिटाकर।।

देश-देश मे द्वेष मिटा,शिखर पर हिन्द पहचान बनाएं।
बंधुता का पाठ पढाकर विश्व गुरू का गौरव पाए।।

हर गांव हर गली  सिंहो का पहरा लग जाए।।
गीदड़ घुस ना पाए हिन्द का ऐसा प्रभाव बनाए।।

इतनी लय से छा जाए हर तरफ खुशहाली।
ऐसा एक नेता चाहिए आज हमे प्रतिभाशाली।।
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३.
राष्ट्र की चुनौतियो पर भी नीति मार्ग अपनाना।
दुष्ट गीदड़ो को दूर भगा,अपना चमन है विकसाना।।

समझौतो की सीमा पर जो ना तनिक घबराए।
विवादो और वादो मे जो कभी न क्रुरता अपनाए।।

जन-जन मे धीरज, संतोष, समता का भाव जगाए।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक अपना  हिन्दुस्तान एक बनाए।।

हर कोने -कोने मे जगाए अलख ग्यान की उजाली।
ऐसा एक नेता चाहिए आज हमे प्रतिभाशाली।।
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४.
है क्या आंधी क्या बवंडर क्या होता तूफानो का भय।
जिनके अंग२ मे बढ़ने का ज्वाल,कर्मो से हो विजय।।

अपने शील,तेज,पौरुष से नव जाग्रति का सूरज उगा दे।
अत्याचारियो के टुकड़े-२ कर मानवता का ग्यान करा दे।।

अंगारो पर चलते जो न अपना अस्तित्व खो पाए।
बेगानो की नगरी मे भी जो रिश्तो की सौगात चढाए।।

हैवानो को दूर हटा,इन्सानो की बने शोभा निराली।।
ऐसा एक नेता चाहिए आज हमे प्रतिभाशाली।।
_____***कुं. गोविन्द चारण***___

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