#Kavita by L R Seju Thob

नव संवत्सर

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प्रकुति का हुआ अनोखा  परिवर्तन

पतझड़ के पश्चात फूटी नव कोपल

खिल उठा प्रकुति का रज रज

धरा के धानी हुए परिधान

हर्षित मन नाच उठा मन मयूर

सही अर्थ में वसंत की हैं बौछार

निकली रश्मि नव संवत्सर की

हुआ नव चेतना का संचार

प्रफुल्लित हुई धरा नव वर्ष की

हिन्दू वर्ष पावन धरा पर

सम्राट विक्रमादित्य की याद दिलाता

चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा

यह विक्रम सन संवत कहलाता

यही नव संवत्सर सन्तुलन साधना

इस दिन ब्रह्मा जी ने किया सृष्टि सृजन

श्री राम का हुआ इसी दिन राज्यभिषेक

आओ मिलकर नववर्ष का मनाये जश्न

सृजनात्मक प्रवत्तियों को चेतन करे

सृष्टि के सृजन का सौरभ फैलाये

विध्वंस की विभीषिका के निर्माण को

हर स्तर पर हतोत्साहित करे

नव संवत्सर शक्ति पूजा का प्रतीक

नौ कन्याओ का पूजन कर

नारी शक्ति का सह सम्मान करें

विक्रम संवत हैं हिन्दू धर्म की बेड़ी

इसी दिन धर्म का शंखनाद करे

विक्रम संवत के सृजन दिवस पर

घर घर भंगवा झंडा फहराये

हिन्दू नव वर्ष को शत शत नमन करे ।।

एल आर सेजु थोब प्रिंस

 

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