#Kavita by LATA RATHORE

सूखा पेड़

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सूखा पेड़ गाँव की पगडंडी के किनारे से
खामोशी में भी एक गीत गुनगुना रहा है l
अपने यौवन की , हरे सावन की यादो को सहेजे ,
जीर्ण अवस्था में भी शान से मुस्कुरा रहा है l
आँगन में बैठे वृद्ध सा ,कमजोर और लाचार सा ,
अपने अनुभव की दास्ता सुना रहा है l
पगडंडी के उस ओर खड़े नए को
बलिदान की एक सीख सिखा रहा है l
छाया भी दी थी उसने हर एक राहगीर को ,
आज कोई देखता नहीं उसके दुख ओर पीर को l
था लदा वो भी उस रोज लाल गुलाबी फूल से ,
खेलते थे ड़ाली पर बच्चे झूल झूल के l
आज वो सूखा खड़ा इस राह पर खामोश है ,
फिर भी मुस्कुरा रहा स्वाभीमान और संतोष से l

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