#Kavita by Laxmi Tiwari

घास

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वही  जो

घोड़ों की नसों मे

खून बनकर  दौड़ती हैं,

वही जो

गाय के थनो से

दूध बनकर फूटती है।

वही जो

बिछी रहती हैं

धरती पर

और कुचली जाती रहती हैं लगातार ,

कि अचानक एक दिन

किले की दीवार

व महल की मीनारो पर

शान से बडी हो जाती है

उन्हें ध्वस्त करने की

शुरुआत करते हुए ।।

 

 

One thought on “#Kavita by Laxmi Tiwari

  • May 16, 2018 at 5:53 pm
    Permalink

    Nice, best wishes for good effort, worth appreciating.

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