#Kavita by Laxmi Tiwari

बेटे की चाहत  में संसार  में आती हैं बेटियां..

त्यौहार सी उमंग  जगाती  हैं बेटियाँ..

 

खाद, पानी, ऊर्जा, बेटे तो हैं..

पर बंजर  पे भी लहराती  हैं बेटियां ..

 

बेटे की चाहत में …

 

सुबह उठाने को ठेले  जाते हैं बेटे ..

पर चाय  पर उन्हें रोज जगाती हैं बेटियां ..

 

बेटे की चाहत में…

 

खेल सिखाते हैं जिंदगी भर बेटे को पर..

अपने विश्वास से हिमालय  पे चढ़ दिखलाती  हैं बेटियां …

 

बेटे की चाहत में …

 

माता-पिता के दुःख का असर  नहीं बेटे पे …

पर छोटी सी चोट पर छटपटाती  हैं बेटियाँ..

 

बेटे के कटु शब्द तीर  की तरह लगते  हैं ..

पर अपने प्यार से इन घावों  को भर जाती हैं बेटियां …

 

बेटे की चाहत में …

 

चाहते हैं लोग कुछ खास बने हमारे बेटे …

पर विश्व स्तर पर देश का सम्मान बढाती हैं बेटियाँ…

 

बेटे की चाहत में …

 

हर चीज़ से अवगत  कराया जाता है बेटों  को …

पर बिन सिखाये तारों को भी छू जाती हैं बेटियां …

 

बेटे की चाहत में …

 

सुविधा का लाभ  उठाते नहीं बेटे …

पर असुविधा में सुविधा बनाती  हैं बेटियां ..

 

बेटे की चाहत में …

 

अगर न करता कोई भेद  बेटी और बेटे में …

तो शायद जन्म से पहले ना गिरायी  जाती बेटियां …

 

लेखक :-  लक्ष्मी तिवारी

 

 

One thought on “#Kavita by Laxmi Tiwari

  • August 14, 2018 at 4:53 pm
    Permalink

    Ok this is a fine poem di

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