#Kavita by M.D.Juber

क़ब्र की मिट्टी

 

मौत का मातम तो

छाई हैं, इस कदर की

ख़ुशी को पनाह ना मिल पाए

आस-पास तो ढूंढते हैं

हम दर्द मेरे

कही क़ब्र की मिट्टी ना उठा ले जाये

 

 

उनकी आँखों की नमी ने भी बताया हैं

गम का मातम उनपर भी छाया है

दीदार तो ना हो सका उनका

आख़िर दीदार पे तो,कब्र पे ही आया हैं

 

गम की दरिया मे डूब के

आँसुओ के धार पे ना आये कोई

ओ क़ब्र के पहरे-दारो

हम तो रोते रह गए बस

हमारी क़ब्र को रोकर,ना भिंगाओ कोई

 

मिट्टी की तो काया थी

मिट्टी मे मिल गई

जिंदगी दिली भी दज हो गई कफ़न में

बस हमारे प्यार का ना

निंदिया मिला जाये कोई

 

~मु.जुबेर हुसैन⁠⁠⁠⁠

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