#Kavita by Madan Mohan Sharma Sajal

क्षणिका

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सास ने कहा-

“बात-बात पर जवाब देती हो,

कुछ तो संस्कार

डाल दिए होते

तुम्हारे माता-पिता ने

तुम्हारी झोली में।”

 

बहू बोली –

“मेरे पिताजी ने

तमाम संस्कारों को

बेचकर ही

आपकी दहेज की मांग

पूरी की है, माँजी।

यह तो आपको

शादी से पहले ही सोचना था

कि आप को दहेज में

कूलर, फ्रिज, एसी, कार

चाहिए थे या,

“संस्कार”

 

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