#Kavita by Maharu Pandit Pyasa

विष्णुपद छंद

वनवास काटकर रामचंद्र,घर को आये थे।

सिया और लक्ष्मण को अपने,सँग सँग लाये थे।

तब लोगों ने दीप जगाकर,खुशी मनाई थी।

उस दिन से दीवाली भारत, भर में आई थी।

 

दीवाली तो दीपों से ही,मनती आई है।

बम और पटाखों की किसने,रीत चलाई है।

सच्ची बातें पकड़ो यारो,झूठी जाने दो।

पर्व  मनाते आऐ पुर्वज,वही मनाने दो।

 

बम का पर्व रहा होता तो,बमवाली होता।

नाम पटाखों पर रखते तो,पटखाली होता।

जब दीपों का पर्व बना तो,यह नाम दिया है।

सच्चे मन से सुमरन करलें,प्रभु मिलन हुआ है।

 

दीवाली को मिट्टी वाले,दीप जलाएंगे।

बिना पटाखों के हम मिलकर,पर्व मनाएंगे।

भारी प्रदुषण से छुटकारा हमको पाना है।

अति सुंदर स्वच्छ वातावरण,सुखद बनाना है।

मेहरू पण्डित प्यासा

 

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