#Kavita by Mainudeen Kohri

*  आखातीज  *

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आओ  आओ   रे   भायां

आई    आई   आखातीज

सुगन   मनावां    होव्वै

आपां   सगळां  री जीत ।।

 

रंग  –  रंगीलो ,  रंग -बिरंगो

बालो  घणो   है    आभो

टाबर  –  टोळी , बुढ़ा – ठेरां

डागळियै  चढ़  गावै   गीत  ।।

 

भांत  –  भांत रा  किन्ना – मंजा

लूंटण्  टाबर  –  बुढ़ा  दौड़ रय्या

बो  $ .. $ ..ई  काट ..$.$य्या हे

बीकाणों  सगळो  बोल  रैय्यो  ।।

 

ओ’  बस -ओ’ बस.  बस   करो

छड़ै   सूं  घालै   है   ढेरिया

लूटै  –  काटै  लाम्बा लडावै पैच

टाबर  कुंजियां भर बणावै गेड़िया ।।

 

खिचड़लो घर  – घर  घमकीजै

सुगन   मनावै घरां में  गोरड़ी

थाळ ययां मोटयारां नै घी सूं भर

छाण – छाण आमल पीव्वै मोकळी ।।

 

पैच  लडावै   खींच ताण  ढ़ील में

किन्नी  काटणिया  रोळा   करै

तापड़ बळगय्यो ,घर में घुस गयी

और  उड़ा  रै   रोवणिया भैयारिया  ।।

 

आओ  आओ  रे    भायां

नुवों सन्देसो लाई  आखातीज  ।।

 

मईनुदीन कोहरी

मोल्ला कोहरियान्  बीकानेर

मो.  9680868028

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