#Kavita by Mainudeen Kohri

समय
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समय  कब  रुकने  वाला  है  ।
आदमी  ही थकने  वाला  है  ।।

समय  भागता  है  प्रति  पल   ।
भगवान  सबका  रखवाला है  ।।

देखते ही देखते  सदियाँ बदली  ।
अत्तीत अब पीछे दौड़ने वाला है ।

कभी धूप  कभी   छाँव की माया
कोई गिरने  कोई उभरने  वाला है

बचपन की अठखेलियों वाला जीवन।
थक  कर यौवन भी जाने वाला है ।।

चांदनी व् अँधेरी  रात का खेल भी ।
पल – पल में  बदलने  वाला  है  ।।

जल -मेघ-हवा  के झोंको  का भी ।
समय की धारा से रुख बदलने वाला है।।

सर्दी-गर्मी का मिज़ाज़ कब बदल जाए ।
मौसम का तेवर न जाने क्या होने वाला है ।।

बड़े बोल-बड़ी बातें कब किसकी रही हैं ।
समय की आंधी में सब उड़ने वाला है ।।

जीवन की गाडी कब जाने कब रुक जाए ।
समय-चक्र से क़ोई नहीं बचने वाला है।।
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मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी ”
मोहल्ला कोहरियान् बीकानेर334001
मो. 9680868028

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