#Kavita by Mainudeen Kohri

मायड़ म्हारी  ——गीत

गोरै   धोरां  री  आ ‘ मायड़  प्यारी
मीठी  बोली  री  आ’  मायड़ म्हारी

आण -बाण  रै  बांकड़ लां  री  आ ‘ धरा
इतिहास  रचियो  जग में  मायड़  म्हारी

धोरां  माथै  मीठा  टहुकै  है  अ ‘  मोरिया
रंग – रूड़ो  घणो  अरो  आ मायड़ म्हारी

कैर – सांगरी – फोफलिया आच्छी  फळी
मोंठ – बाजरी  जीमण री  मायड़  म्हारी

छाछ – राबड़ी  अर्  आछो  लागै  खीचड़ो
धडी -धडी  जिमारां  री  आ ‘मायड़ म्हारी

दाती – कस्सी – दातरियो  अर्  आ ”झाड़बढ़
भुर्र्ट – सेवण – घास  री  आ” मायड़  म्हारी

ऊंठा  री  जठै  कतारां  ऋ  कतारां  चालै
गोरबन्ध  नखरालै  री  आ”  मायड़  म्हारी

बोरटी – खींप -सिणिया – बुई  अर्  फोग
सोवणै  झूंपडा – झूंपड़ी री आ’मायड़  म्हारी

तीज – त्यौहार  आच्छा  गाभा  पैरे  गोरी
घूमर  घमकावै  जठै  आ ” मायड़  म्हारी

ख्वाज़ा – सूफी – रामदेवरा  रा  धाम  जठै
मीरां – पदमण  री सोवणी  मायड़  म्हारी

सुरां  री तलवारां अर्  खांडा  जठै  चमक्या
गढ़ – किला  अर्  वीर -धीरां  री मायड़ म्हारी

मई नुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी ” 9680868028

Leave a Reply

Your email address will not be published.