#Kavita by Mainudeen Kohri

दहेज़ एक परिपाटी है
अब बन गई बिमारी है
दहेज़ नहीं अब भीख है
समाज की अब लाचारी है

दहेज़ लेना देना पाप है
माँ बाप को बेटी प्यारी है
बेटी बिन ब्याह रह न जाए
अब दहेज़ एक महामारी है

लाईलाज नासूर है दहेज़
इसलि बेटी अब बेचारी है
पवित्र रिश्ते में दहेज़ का रोग
डोली से पहले अर्थी की तैयारी है

दहेज़ में अविशवास ही पलता है
दहेज़ की चक्की में पिसती नारी है
रिश्तों की कथनी-करनी में अन्तर
नारी की दुश्मन नारी ही हारी है ….

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