#Kavita by Mainudeen Kohri

ज़मीन – ए – वतन

******

ए…ज़मीन – ए – वतन

ए…ज़मीन -ए  – वतन  ।

तुझको   मेरा    नमन

तुझको   मेरा    नमन   ।।

 

आबरू तेरी जाने ना देंगे कभी   ।

जब तलक बाजुओं में हमारे है दम ।।

दुश्मनों के इरादों का करदेंगे दमन

ए ज़मीन……………………….।

 

हौसलें हैं बुलन्द छू लेंगें  गगन   ।

कोई छू के तो देखे हमारी तपन ।

बाँधे रखते हैं सर पे हर दम कफ़न

ए ज़मीन…………………………।

 

तेरी शान-ओ-शौकत जमाने भर में है ।

ऊँचे आकाश के चाँद – सितारों से भी  ।।

खुशियों से भर देंगें ये सारा चमन ।।।

ए ज़मीन……………………….।

 

बदल के रख देंगें जमाने की तस्वीर ।

चमकेगी जमाने में जयहिन्द की शमसीर ।।

जमाने को देंगें हम तौफा- ए- अमन ।।।

ए ज़मीन…………………………।

 

ये तिरंगा करोड़ों के दिलों की है धड़कन ।

हर इक के दिलों में बसा है जन-गण-मन ।।

शहीदों की शहादत को करते हैं नमन  ।।।

ए ज़मीन…………………………।

 

फूले-फले सदा हमारा प्यारा ये चमन ।

आतंक को सदभाव से कर देंगें दफन ।।

जिओ और जीने दो की हमारी है लगन ।।।

 

ए ज़मीन …………………वतन ।

तुझको…………………….नमन।।

 

रचनाकार:–मईनुदीन कोहरी

नाचीज़ बीकानेरी

मोहल्ला कोहरियान् बीकानेर

मो*  9680868028

Leave a Reply

Your email address will not be published.