#Kavita by Mainudeen Kohri

बेटियाँ
***
जिस आँगन में जन्मी
खेली – पली – पढ़ी बेटियाँ
उस आँगन को छोड़
दूजै आँगन से समझोता
कर लेती है प्यारी बेटियाँ —

माँ – बाप के लाड – प्यार
सौ सुखों को त्याग कर
अपनों की आँखों में आँसू
अपनों से विदाई का पल
बाबुल केघर से जाती बेटियाँ

सपने में भी नहीं देखा कभी
वो घर , दीवार -ओ- दर कभी
सब कुछ नया ही नया वहाँ
उस घर को भी अंगीकार
दिल से कर लेती है बेटियाँ —

नये रिश्तों की राह पर
आहिस्ता -आहिस्ता कदम रख
मन को समझा नये संसार में
स्नेह रूपी डोर में बाँध कर
अपनेजीवन को संवारती बेटियाँ

पढ़ी -लिखी बेटी अपने संस्कारसे
घर -परिवार -समाज को संवारती
बेटी बचाओ अभियान को भी
घर – घर की आवाज बना कर
अक्षरशः जीवन में उतारती बेटियाँ

मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी ”
मोहल्ला कोहरियान् बीकानेर
मो.9680868028

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