#Kavita by Mainudeen Kohri

नशे का करो नाश
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नशा कर दे घर का नाश आदमी चलती फिरती लाश

गुटके – पुड़ी खाओ ना कोई
तन – मन का हो जाए नाश

बीड़ी – सिगरेट से दूर रहना
कभी खेलना ना तुम ताश

खांसी – दमा – कैंशर का खतरा
नशा आदमी का करता नाश

नशे की लत कर देती सर्वनाश
घर मेंकलह हो जाए सत्या नाश

शराब -अमल – डोडा से रहें दूर
घर- समाज- राष्ट्र का करदे नाश

अणुव्रत अपना करछू लेंगे आकाश
आओ सब मिल नशे का करें नाश

मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी ”
मो.9680868028

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