#Kavita by Mainudeen Kohri

गीत **

गीत गाए जा
गुनगुनाए जा
हो सके तो – हो सक तो
मजलूम का दिल बहलाए जा

राहों में कांटे भी आएंगे
उन से ना घबराना
हो सके तो – हो सके तो
काँटों को भी सहलाए जा

पर सेवा उपकार है
जीवन का इसमे सार है
हो सके तो — हो सके तो
नर सेवा में जीवन लगाए जा

काम-क्रोध -लोभ को तज दे
ये जीवन फिर ना आएगा
हो सके तो — हो सके तो
हंसी-ख़ुशी से जीवन जीए जा

ऐ ” नाचीज़ ” तू भी सोच ले
दुनियाँ से इक दिन जाना है
हो सके तो — तो सके तो
मन-वचन-कर्म से अच्छा किए जा

मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी “मो .9680868028

Leave a Reply

Your email address will not be published.