#Kavita by Mainudeen Kohri

राजस्थान  दिवस

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महैं  राजस्थान  हूं

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महैं  राजस्थान  हूं

राखूं  म्हारी  पहचाण  हूं

आ ” धरती  घणी  जूनी है

मानव  सभ्यता  रो  जलम  अठै ।

 

अरावली  इय्यै  री  साख  भरै

पुष्कर  तीर्थ  इय्यै  री  पुष्टि  करै

ऋग्वेद  री  ऋचावां  कैवै

सुरसती  नदी  बैवै  है   जठै  ।

 

भासा   री  उतपति इण  माथै

मीठी  मायड़  भासा घणी महताउ

वैभव  री  सुवास  आखै  मुलकां

साहित्य  रो  अखूट खजानो अठै ।

 

टणकी  घणी  आ” राजस्थान भोम

जिण  में  जलमी  मीरां

सोवणी – मोवणी आ ” धरा

वीर – धीर -भगत  हय्या अठै

 

धोरां  ऋ  धरा  रा  रुंख

प्रकृति  अर्  संस्कृति  में  गाइजै

रूंखा  री  रिच्छया  सारु

करमां – गोरां  याद  आवै  अठै  ।

 

महैं  भारत  री  सीमा रो रक्षक हूं

देस  री  आण – बाण  म्हारै  तणा

तीज – तिंवार  हिळ – मिळ  मनावां

सगळै  धरमां  रा  धाम  अठै  ।

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