#Kavita by Mainudeen Kohri

मेरी  रचना

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हर  आदमी  है  परेशां

जाएं तो  जाएं  कहां  ।

मुल्क  के  रहनुमां  भी

कितने  कमजोर  है  यहां  ।।

 

अब  तो  इंसानों  का  खून भी

पानी  बन  गया  है  यहां   ।

अब अखबारों की  सुर्खियां  भी

दिल  दहलाने  वाली  है  यहां  ।।

 

वतन- परस्ती  का  ढोंग  कैसा

सस्ते में  बिक  रहा  राष्ट्र- भक्त यहां ।

चोर – चोर  से  कहे  चोरी  न कर

अब  हर  शख्स  चोर लगता यहां ।।

 

कौमी  एकता की  बेमानी सी बात

हर घर टूटता  सा  लगता है यहां ।

जात -पांत मज़हब  के  ठेकेदार

खून  के  प्यासे हैं  इंसान  यहां ।।

 

ईमानदारी  का  मुखोटा तो रखते हैं

गिरेबां  में  झांकते  नहीं लोग यहां ।

दौगले  लोगों  की हरकते अजीब है

“नाचीज़ ” अब तो बाप-बेटे लड़ते यहां ।।

 

मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी ”

मोहल्ला कोहरियान् बीकानेर राज. मो.9680868028

 

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