#Kavita by Mam Chand Agrwal Vasant

एक बार मुखिया बनने दो

मैं भी कुछ कर जाऊँगा।

कुछ को तोड़ूँ,कुछ को जोड़ूँ।

धन की खातिर माथा फोड़ूँ।

कोई अगर विरोध करे तो

उससे अपना नाता तोड़ूँ।

सरकारी खर्चे से अपने

घर में नल लगवाऊँगा।

 

कभी-कभी जागरण कराऊँ

भक्ती भाव बढ़ाऊँगा ।

जिस नेता से हित हो अपना

उसको अतिथि बनाऊँगा।

तेरा शीश,मोजरी तेरी

भंडारा करवाऊँगा।

 

तेरे घर में होंगें डाक्टर,

सी.ए.या बैरिस्टर।

मुझको क्या लेना-देना है

बतलाओ ऐ मिस्टर।

मैट्रिक फेल पुत्र का मेरे

मैं सम्मान कराऊँगा।

एक बार मुखिया बनने दो

मैं भी कुछ कर जाऊँगा।

-वसंत, जमशेदपुर,09334805484

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