#Kavita by Mam chand Agrwal

आओ मिल कर करें आरती

आओ मिल कर करें आरती
अग्रसेन महाराज की।
नृप वल्लभ के पुत्र लाडले
अग्रवंश सरताज की।

समता ममता की मूरत थे
लेश नहींअभिमान था।
भरा रहे धन-धान्य हमेशा
लक्ष्मी का वरदान था।
डरे नहीं जो कभी किसी से
झुके नहीं रिपु के आगे-
दसों दिशाओं में गूँजा
करता जिसका यशगान था।
देवों ने भी करी वंदना
आकाशी परवाज की।

व्याह हुआ जब नागवंश में
बनी माधवी महारानी।
लाल चुनरिया ओढ़े आयी
महलों में माता रानी।
प्रकृति नटी ने कदम -कदम पर
फूल बिखेरे मनमोहक-
लगा लजाने स्वर्ग देख कर
अग्रोहा सी रजधानी।
गूँज उठी शहनाई फिर तो
बात करूँ क्या साज की।

यज्ञ अठारह किये आपने
ध्वनि गूँजी यशगान की।
द्रवित हुआ जब हृदय आपका
रुकी प्रथा बलिदान की।
सत्य-अहिंसा धर्म बन गया
गोत्र अठारह अपनाये-
अग्रवंश की नींव पड़ी फिर
और विश्वकल्याण की।
चंदन से पवित्र माटी है
अग्रोहा गणराज की।
आओ मिल कर करें आरती
अग्रसेन महाराज की।
-वसंत जमशेदपुरी,09334805484

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