#Kavita by Mamchand Agrwal Vasant

जयपुर घूमे जाइब

 

ना जाइब कश्मीर बलम जी,देहरादून न जाइब।

ना खजुराहो,ना एलोरा,ना अल्मोड़ा जाइब।

सोनाचूर के भात न खाइब,ज्वार-बाजरा खाइब।

नैनी ताल न घूमब बालम,जयपुर घूमे जाइब।

 

हवामहल अर जंतर-मंतर,धोराँ वाली धरती।

दर्शन करब जीण माता के,जे जग के दुख हरती।

आमेर के देबी पूजब,अच्छत,फूल चढ़ाइब।

 

देखब गढ़ चित्तौड़,विजय स्तंभ पद्मिनी रानी।

गोरा के मर्दानी देखब अर बादल के पानी।

जौहर के ज्वाला हम देखब माथे भसम लगाइब ।

 

राणा के जनम स्थल देखब,देखब हल्दी घाटी।

बीकानेर, जोधपुर देखब,देखब शेखावाटी।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर,इकतारा ले गाइब।

 

दिलवाड़ा के मंदिर देखब,टॉड रॉक अर आबू।

नकी झील के देखे खातिर मनवा बा बेकाबू।

सनसेट पाइंट से रउवा के डूबत सुरुज देखाइब।

नैनीताल न घूमब बालम जयपुर घूमे जाइब।

-मामचंद अग्रवाल वसंत

सीमा वस्त्रालय ,राजा मार्केट

डिमना रोड,मानगो,जमशेदपुर

09334805484

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