#Kavita by MamChand Agrwal Vasant

गीत………
आगे बढने वाले सुन लो,
नहीं देखते पीछे मुड़के।

पूरब में सूरज उगता है,
धीरे-धीरे बढ़ता जाता।
जैसे-जैसे दिन चढ़ता है,
सूरज भी है चढ़ता जाता।
नहीं कभी भी थकता है वह,
नहीं कभी सुस्ताता रुक के।

गोमुख से जब गंगा निकले,
हा-हा करती शोर मचाती,
चट्टानों से कब डरती है,
अपनी राह बनाती जाती।
सागर से मिलने से पहले,
नहीं कहीं भी ठहरे,थक के।

जीवन पथ में बढ़ते रहना
ही सच्चा जीवन होता है,
उच्चशिखर पर चढ़ते रहना
ही प्यारा यौवन होता है।
स्वभिमान से जीने वाले
कहाँ किसी के आगे झुकते।

आगे बढ़ने वाले सुन लो
नहीं देखते पीछे मुड़के।
-वसंत जमशेदपुरी,9334805484

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