#Kavita by Mamchand Agrwal Vasant

मेरे प्यारे राजस्थान

 

मेरे प्यारे राजस्थान

तेरी अजब निराली शान।

 

मीठे बोर मतीरों वाली।

रजवाड़ों की शान निराली।

मोरों की पी,पी से गुंजित

प्यारी धरती धोरां वाली।

कैसे गाऊँ मैं गुणगान।

मेरे प्यारे राजस्थान।

 

करणी माता,जीण भवानी।

और झूँझणू वाली रानी।

सालासर,मेंहदी पुर वाले

बालाजी की अजब कहानी।

कोई कैसे करे बखान।

मेरे प्यारे राजस्थान।

 

गोरा,बादल तेरी शान।

जिसने रखा धरा का मान।

शीश की बिना किए परवाह

बचाया नारी का सम्मान।

खिलजी रो-रो के हैरान।

मेरे प्यारे राजस्थान।

 

प्रेम चिह्न दे दी क्षत्राणी।

शीश काट कर हाड़ा रानी।

महाकाल बन चुड़ावत ने

युद्ध किया भारी तूफानी।

रिपु को मारा तेगा तान।

मेरे प्यारे राजस्थान।

 

राणा जी जब वन-वन भटके।

भूख प्यास के सह कर झटके।

मातृभूमि पर किए निछावर

भामासा ने धन के मटके।

अमर हो गया उसका दान।

मेरे प्यारे राजस्थान।

तेरी अजब गजब की शान।

-मामचंद अग्रवाल वसंत

सीमा वस्त्रालय,राजा मार्केट,डिमना रोड,मानगो बाजार, जमशेदपुर,831012

 

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