#Kavita by Manglesh jaiswal

         *माँ*
माँ असीमित है, माँ अविरल है,
माँ अद्वितीय है माँ निश्छल है,
माँ खुदा है, माँ ईश्वर है,
माँ दुआ है , माँ नश्वर है,
माँ धरा है, माँ  परमेश्वर हैं,
माँ मन्नत है माँ जन्नत है,
माँ सुकून है, माँ शांति है,
माँ शीतल है, माँ धेर्य है,
माँ प्रकृति है, माँ आकृति है,
माँ प्रेम है,माँ परिवेश है,
माँ अजान है, माँ आरती है,
माँ सरोज है ,माँ भारती है,
माँ दृष्टि है, माँ सृष्टि है,
माँ अमिष है, माँ ईश है,
माँ सुफल है, माँ सुजल है,
माँ राम है, माँ सीता है,
माँ सुनीता है माँ मिशिता है,
माँ मनोज है, माँ मीना है,
माँ मोक्षः है, माँ जीना है,
माँ लक्ष्मी है, माँ नारायण है,
माँ मानस है, माँ पारायण है,
माँ लता है, माँ निवासः है,
माँ शारदा है, माँ विश्वाश है,
माँ तुलसी है, माँ कुरान है,
माँ सुर है, माँ पुराण है।
माँ कृष्ण है, माँ लीला है,
माँ मंगल है, माँ ब्रह्याण्ड,
माँ रब  है, माँ  सब है,
माँ माँ है, माँ माँ ही है।

           डॉ मंगलेश जायसवाल
कालापीपल 9926034568

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One thought on “#Kavita by Manglesh jaiswal

  • May 16, 2017 at 5:10 pm
    Permalink

    Behtrin rachna hai ji.

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