#Kavita by Manilsh Kumar Pathak

दिल के अंदर आग रखना कौन चाहेगा
आंख को अश्कों से भरना कौन चाहेगा
मर गए एक बार तो फिर हो मुकम्मल जिंदगी
इस तरह से रोज मरना कौन चाहेगा ?

नींद में सोया हुआ हूं मैं तेरे आगोश में
अब ना आना चाहता हूं नींद से मैं होश में
आधी रातों में बिछड़ना कौन चाहेगा ?

फिर से तेरे पास आना
फिर से तुझसे दूर जाना
अब नहीं मिलता है रब्बा
टूटे दिल को एक ठिकाना
फिर से आशियां लुटाना कौन चाहेगा ?

फिर से तेरे पास आना कौन चाहेगा
आके फिर से गुनगुनाना कौन चाहेगा
गर जो कोई रूठ जाए मामूली सी बात पर
गीत तुमको फिर सुनाना कौन चाहेगा ?

दिल के अंदर तुझको रखकर अपना माना है तुझे
इस तरह दिल में बसाना कौन चाहेगा
चंद लम्हों में सिमट जाएगी यह निगोड़ी जिंदगी नफरतों से दिल जलाना कौन चाहेगा?

मनीष कुमार पाठक
8849828749

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