#Kavita by Manoj Kumar Srivastava

आज का श्रृंगार

काॅलेज के प्रोफेसर ने,

छात्रा से श्रृंगार रस का उदाहरण पूछा,

छात्रा उत्तर दे रही थी-

’’राम को रूपनिहारत जानकी’’

प्रोफेसर ने बीच  में टोकते हुए कहा-

’’पुराना डाॅयलाग मत सुनाओ,

हमें कुछ नया चाहिए,

छात्रा चुप खड़ी रही’’

प्रोफेसर ने फटकारते हुए कहा-

जल्दी सुनाओ नहीं तो,

खींच के लगाउंगा बेंत में,

छात्रा कह उठी-’’सन्-सनन्-सांय-सांय

हो रहा था खेत में’’

सर! आप ही ने कहा था-

’’अपने दिमाग का

सारा पट खोल देना,

जब कोई पंक्ति ना मिले तो,

यही पंक्ति बोल देना,

परीक्षा हाल में अंग्रेजी का,

पेपर चल रहा था,

बगल में बैठा प्रोफेसर,

तंबाकू मल रहा था,

उसी वक्त एक छात्र ने,

जोर से आवाज लगाई,

पानी! पानी! पानी!

प्रोफेसर ने कहा-’चुप रहो!

यहाँ लड़कों को,

पानी एलाउ नहीं है,

ये परीक्षा हाल है,

कोई प्याउ नहीं है,

छात्र ने कहा-सर!

अभी तो मेरे बगल में,

बैठी लड़की ने,

1 घंटे में,

4 ग्लास पानी पी है,

उससे तो आपने,

कोई शिकायत नहीं की है,

प्रोफेसर ने कहा-बेवकूफ!

यह तो गवर्मेंट रूट है,

तेरे बगल में बैठी कन्या है!

उसे 50: आरक्षण की छूट है।

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