#Kavita by Manorma Ratle

सहनशक्ति…

 

कितनी ही बार …

हमने सैकड़ो के मुख से सुना होगा…

भैया जिसके बाद सहनशक्ति…

या धैर्य  है…

वो सब कर सकता है…

उसके लिये…

असंभव कुछ नहीं…

और कितनो ने…

कितनी बार कहा होगा…

भैया…

अब हमारी सहनशक्ति नहीं रही…

कि अब हम….कुछ और सह सके..।

बताइये…

ये कभी खत्म होती है ….क्या….?

कभी आप माँ बाप की सुनते…

कभी भाई की…

कभी पति की…

कभी सास ससुर की…

कभी ननद की

और फिर अपने ही बच्चों की…

सुनते है ना..।सहते है ना…

कहा खत्म होती..

बताइये…ये तो नाते रिश्तों की बात है..

अभी दुनिया दारी की तो बात हुई नहीं…

किस किस सै…

कब कहा सुनना पड़ता है…

कहाँ पता होता है…

पर सुनते है ना..।

तो जब गैरो की सुन सकते…।

तो अपनो की क्यों नहीं….

मत बनो..पत्थर..

अगर .जिंदगी मौका दे..।

रिश्ते बनाने का…

तो पीछे मत हटे..

पकड़ ले हाथ…

कर ले साथ….

क्योंकि कोई बात कभी …

खत्म नहीं होती…

सिर्फ हम खत्म होते है…

बाते तो रह जाती है…

हमें..।

अच्छा बुरा..

साबित करने को……

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.