#Kavita by Manorma Ratle

बहाने

 

 

तेरे मेरे…

के चक्कर में…

जाने….

हमने …

क्या क्या…

खो दिया…

या ये कहे…

खुद को खो दिया….

सच…।

इतने स्वार्थी तो ना …थे हम

फिर …कैसे…कब….?

ये हो गया…।

अरे…

वो तेरे है….।

तो भी …इंसान

वो मेरे है….

तो भी इंसान…

ना करो प्रेम….।

पर..दया तो रख…

किसी भूखे..को रोटी दे..

जरूरत मंद की…

कुछ मदद ..।

इतना ही तो….

सब को चाहिए…

है ना…।

फिर क्यों बहस…

भूल जाने का बहाना…

मत करो दोस्तों…

क्योंकि कभी…

उसने भी …..किसी से …

किया था…..

सब वास्तविकता जानते है…

वो और है…

कि जानते नहीं….

मत विवश करो…।

किसी को….

कि वो तुम्हें ..।

आइना दिखाये..।

उसके पहले…।

स्वयं को देख ले…

 

मनोरमा रतले

 

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