#Kavita By Manorma Ratley

बेरोजगारी..
शिक्षा के अब मायने
बदल गये..
पहले लोग शिक्षित होते थे..
ज्ञान पाने के लिये…
पर अब…
शिक्षित होते है…
धन कमाने के लिये..
वो भी ..अपूर्ण ज्ञान के साथ..
वो समझते..कि
जिसने पढा़ई कर ली ..
वो सिर्फ नौकरी करेगा.।
या डाक्टर ,इंजीनियर बनेगा..
अब बताईये..
इस सोच के साथ..
देश में बेरोजगारी ना बढ़ेगी ..
तो क्या बढ़ेगा..।
अब बताये..।
सभी नौकरी करेगे..।
तो अपने परिवारिक..।
पुश्तैनी…
धंधो की विरासत ..
को कौन संभालेगा..।
बताईये आज..
इसी सोच के चलते..
क ई कलाये विलुप्त होती जा रही..
बढ़ ई के बेटे ने बेटे को आगे बढ़ने …
को पढ़ाया…
पर बेटे ने चार अक्षर …
सीख ..पिता को ही सिखाया…
अब मै ये धंधा नहीं करूंगा..
नौकरी करूंगा..
बताईये..।
क्या धंधे के लिये…
ज्ञान जरूरी नहीं…
क्या धंधे वाले..
अज्ञानी है..
फिर क्यों नहीं हम सोचते..
कि हमारी विरासत को..।
हम नहीं संभालेगे तो ..।
कौन संभालेगा…
अपने ज्ञान से..।
आप अपने धंधे का..
सही प्रचार प्रसार करे..।
अगर इस सोच से ..।
हम आगे बढ़ते तो..।
इस तरह बेरोजगारी..।
सुरसा के जैसी ..
ना बढ़ती…
और ना ही
देश के ऐसे हालत होते..
युवाओ को समझना होगा..
कि हम किसान भी बन सकते है
जो जैविक खेती करे…
और समाज को एक न ई राह दे…
हम जब सोच बदलेगे..
तभी समाज बदलेगा…
देश के युवाओ को..
फिर रोजगार दिखेगा

मनोरमा रतले

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