#Kavita by Manorma Ratley

भूख

 

यू ही नहीं कहते …

भूखे भजन ना हो गोपाला…

क्योंकि बिन भूख के …

स्वादिष्ट भोजन भी…

अच्छा नहीं लगता….

ऐसे ही रिश्ते मे भी…

रिश्तों की भूख …

होना चाहिए…

उन्हें निभाने की…..

क्योंकि जो रिश्ते ….

ढोये जाते…..

वो अक्सर टूट जाते है

और जिनकी भूख रहती…

वो और भी अच्छे हो जाते…

बनाये रखिये ये  भूख…

अपने अपनो की…

कभी कभी गैरो की भी…

पर…

ये ना हो…।

गैर अपने बन जाऐ…

और अपने पीछे छूट जाऐ…

क्योंकि रूपय पैसे की भूख…

मान सम्मान की भूख…..

ये ऐसी भूख है…

जो पहले…

अपनो को ही छुड़ाती है…

अपने आज आऐ .।।

या कल..।।

या फिर रोज…

सम्मान में कमी ना होने दे…

क्योंकि वो आपके अपने है…

उन्हें भूख है …

आपसे मिलने की…..

 

मनोरमा रतले

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