#Kavita by Mash Prakash Panchal

बस यूँ ही … समझ आए ना!

…और क्या क्या करूँ तेरे लिए।
…या फिर मर जाऊं तेरे लिए। ।

इसलिए छोङा है घर मैंने।
कि कुछ कर जाऊँ तेरे लिए। ।

मै रास्ता हूँ तू मंजिल मेरी।
तो क्या घर आ जाऊँ तेरे लिए। ।

भीङना सिखाया है जिन्दगी से तूने।
तो क्या डर जाऊँ तेरे लिए। ।

अनमोल पल भी आता है मस्त जिन्दगी में।
तो क्या इधर उधर हो जाऊँ तेरे लिए। ।

– मस्त प्रकाश पांचाल मेघवाल अरणाय सांचोर जालोर राजस्थान

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