#Kavita by Mast Prakash Panchal

धन तेरस या धन तरस

अमीरों के लिए आज धन तेरस है ।।
गरीबों के लिए तो हर दिन धन तरस है ।।

अमीरों ने सिर्फ बेचना सीखा है
हम गरीबों को तो सिर्फ खरीदना सीखा है ।।

अमीर तो हर बार हर क्षण ताज़ा होता है ।
खरीदने वाला ही आखिर बाजार का राजा होता है

गरीब की नज़र में अमीर शिकारी होता है ।
उसकी कोई परिभाषा नहीं जो भिखारी होता है

अमीरों ने तो सिर्फ ग़रीबी की तस्वीरें खींची है ।
सियासत ने तो हर बार ही आँखे मींची है ।।

हमारी खरीद पर दीवाली टिकी हुई है ।
बस इसी पर अमीरी-गरीबी टिकी हुई है ।।

प्रकाश पांचाल
सांचोर राजस्थान

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