#Kavita by Mast Prakash Panchal

बस यूँ ही … मानसिक गुलामी

बच्चे हमारे हिसाब से।
नामकरण तुम्हारे हिसाब से। ।

शादीयो में सब कुछ हमारा
मुहूर्त तुम्हारे हिसाब से। ।

आने जानें का काम हमारा है
सुकून अपसुकून तुम्हारे हिसाब से। ।

कर्म करते रहे मानवता के लिए।
वर्ण व्यवस्था बना ली तुम्हारे हिसाब से। ।

सदियों का हिसाब अभी बकाया है
अब कुछ नहीं तुम्हारे हिसाब से। ।

अब सहना नहीं, सीधा मुंह पर कहना है
जो होगा वो संविधान के हिसाब से। ।

स्वरचित रचना–मस्त प्रकाश पांचाल
सांचोर जालोर राजस्थान
9694523652

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