#Kavita by Mast Prakash Panchal

बस यूँ ही … वो रावण कब जलाओगे

ऐ रावण तेरे वंशज आज भी जिंदा है
हरण हत्या के बाद भी कातिल तेरे जिंदा है ।।

कागज़ के पुतले को कब तक जलाओगे रावण मान कर
असली रावण तो हर घरों में जिंदा है ।।

ऐ रावण तूने तो सिर्फ अपहरण किया था
आज वाले तो मार काट के फिर भी जिंदा है ।।

गिरगिट सा हो गया है तू रावण
तू रंग बदल कर जिंदा है ।।

इंसान को इंसानियत से जीना सीखा दे
जाति धर्म के नाम पर तू जिंदा है ।।

कैसे भरोसा करें आज के दौर में
रिश्तों को तार तार करने में तू जिंदा है ।।

ऐ मस्त तु तो समझा कर…
शायद तेरे में भी रावण जिंदा है ।।

स्वरचित– मस्त प्रकाश पांचाल
सांचोर राजस्थान

One thought on “#Kavita by Mast Prakash Panchal

  • October 18, 2018 at 7:35 am
    Permalink

    Nice lines bhai shab…….bas u hi……age badte raho

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